कटनी: मध्य प्रदेश के कटनी में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। कार्रवाई के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर कटनी स्थित CSP कार्यालय को भी सीज कर दिया गया है। मामला कंहवारा में जमीन के कथित विवादित हस्तांतरण से जुड़ा है, जिसमें 82.86 लाख रुपये की गाइडलाइन वैल्यू वाली जमीन को कथित तौर पर महज 18.20 लाख रुपये में दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कराने का आरोप है। मामले में CSP नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब जमीन के दस्तावेजों, बैंक खातों से हुए लेन-देन और इस पूरे सौदे में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी साफ किया गया है कि पुलिस प्रशासन में पद के दुरुपयोग, दबाव या लापरवाही को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद CSP पर हुई कार्रवाई
कटनी CSP नेहा पच्चीसिया के निलंबन का आदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से इस कार्रवाई की जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से यह संदेश भी दिया गया है कि कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों में किसी अधिकारी द्वारा पद का गलत इस्तेमाल किए जाने की शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद मामला अब विभागीय जांच के साथ-साथ पुलिस की जांच के दायरे में भी है।
निलंबन के बाद CSP ऑफिस भी किया गया सीज
CSP के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद पुलिस मुख्यालय, भोपाल के निर्देश पर कटनी स्थित CSP कार्यालय को सीज कर दिया गया। कार्यालय को सीज किए जाने की कार्रवाई का उद्देश्य जांच से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड और साक्ष्यों को सुरक्षित रखना बताया गया है। पुलिस जांच में कंहवारा जमीन सौदे से संबंधित केस डायरी, कार्यालयीन दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और दूसरे महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आ सकते हैं। ऐसे में कार्यालय को सीज कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि जांच से संबंधित किसी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ न हो और सभी दस्तावेज सुरक्षित रहें। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभागीय जांच और SIT स्तर की जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
क्या है 82.86 लाख की जमीन का पूरा मामला?
पूरी कार्रवाई की जड़ कंहवारा की एक जमीन से जुड़े कथित सौदे में है। यह जमीन हत्या के एक मामले में नामजद आरोपी बताए जा रहे रमेश लोधी से संबंधित बताई गई है। जांच में आरोप है कि जमीन को दबाव बनाकर वास्तविक मूल्य से काफी कम कीमत पर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कराया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जमीन की गाइडलाइन वैल्यू करीब 82.86 लाख रुपये थी, जबकि इसकी रजिस्ट्री 18.20 लाख रुपये में कराए जाने की बात सामने आई है। यानी जिस जमीन का सरकारी गाइडलाइन मूल्य 80 लाख रुपये से अधिक बताया जा रहा है, उसका हस्तांतरण करीब 18 लाख रुपये में किए जाने का आरोप है। इसी अंतर ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। हालांकि, जमीन के इस कथित सौदे में किसकी क्या भूमिका थी, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
मारूफ अहमद हनफी को जमीन ट्रांसफर कराने का आरोप
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार जमीन की रजिस्ट्री मारूफ अहमद हनफी के नाम कराई गई। पुलिस जांच में मारूफ को कथित तौर पर इस पूरे सौदे में फ्रंटमैन के रूप में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आने की जानकारी दी गई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि जमीन के हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया किस तरह हुई, इसमें किन लोगों की भूमिका रही और रजिस्ट्री के लिए रकम की व्यवस्था कहां से की गई। इसी क्रम में बैंक खातों और पैसों के लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
CSP के करीबी बताए जा रहे व्यक्ति के खातों से फंडिंग का दावा
जांच में एक और अहम जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार, जमीन के सौदे से जुड़ी रकम में क्षितिज राज बारापात्रे के बैंक खातों से फंडिंग किए जाने की बात सामने आई है। क्षितिज राज बारापात्रे को CSP नेहा पच्चीसिया का करीबी बताया जा रहा है। अब जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि उनके खातों से रकम किस उद्देश्य से ट्रांसफर की गई और जमीन के कथित सौदे से उसका क्या संबंध है। पुलिस बैंक ट्रांजैक्शन, संबंधित खातों और जमीन के दस्तावेजों को आपस में जोड़कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां तलाश रही है।
CSP समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR
इस मामले में कटनी के कुठला थाने में CSP नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। FIR में नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें धारा 61, 198, 199(b), 308(7) और 318(4) शामिल हैं। अब पुलिस इन धाराओं के तहत दर्ज मामले से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
जांच में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
जमीन के कथित कम कीमत पर हस्तांतरण के मामले में जांच एजेंसियों के सामने कई अहम सवाल हैं। सबसे पहले यह पता लगाया जा रहा है कि जमीन की वास्तविक स्थिति और उसकी गाइडलाइन वैल्यू क्या थी। इसके अलावा जांच में यह भी देखा जा रहा है कि:
जमीन की रजिस्ट्री किस प्रक्रिया के तहत कराई गई।
18.20 लाख रुपये की रकम का भुगतान किसने किया।
बैंक खातों से किस-किस तारीख को लेन-देन हुआ।
क्षितिज राज बारापात्रे के खातों से रकम का जमीन सौदे से क्या संबंध है।
CSP नेहा पच्चीसिया की कथित भूमिका क्या रही।
मारूफ अहमद हनफी को जमीन के हस्तांतरण में किस तरह शामिल किया गया।
जमीन के दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड किसके पास थे।
इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आने की उम्मीद है।
SIT और विभागीय जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी
मामला सिर्फ FIR तक सीमित नहीं है। CSP के निलंबन के साथ विभागीय जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा SIT स्तर पर भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य पूरे मामले की अलग-अलग पहलुओं से जांच करना है, ताकि जमीन के कथित सौदे से लेकर वित्तीय लेन-देन और पुलिस अधिकारी की भूमिका तक सभी बिंदुओं की पड़ताल हो सके। सरकार की ओर से निष्पक्ष जांच पर जोर दिया गया है, इसलिए आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और कार्रवाई पर नजर रहेगी।
कार्यालय सीज करने से क्या फायदा होगा?
CSP कार्यालय को सीज करने का सबसे बड़ा उद्देश्य जांच से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना है। किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच के दौरान कार्यालय में मौजूद दस्तावेज, कंप्यूटर रिकॉर्ड, केस डायरी या अन्य डिजिटल सामग्री महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती है। ऐसे में कार्यालय को सील करने से जांच एजेंसियों को संबंधित रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। पुलिस इसी तरह के दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के जरिए मामले की वास्तविक स्थिति तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
सरकार ने दिया सख्त कार्रवाई का संदेश
इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से दिए गए निर्देश को पुलिस प्रशासन के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में लापरवाही, दबाव या पद के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि मामले में आरोप कितने सही पाए जाते हैं और किन लोगों की भूमिका साबित होती है। फिलहाल निलंबन, FIR और कार्यालय सीज होने के बाद कटनी का यह मामला प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।