भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की EVM शेयरिंग पॉलिसी को चुनाव प्रबंधन में संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और आर्थिक बचत की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है। इस नीति के सफल क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश को ₹11.22 करोड़ का राजस्व मिला, जबकि महाराष्ट्र, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को नई EVM खरीदने से करीब ₹200 करोड़ की बचत हुई।
स्वतंत्रता दिवस पर अधिकारी सम्मानित
EVM शेयरिंग पॉलिसी के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया गया। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार श्रीवास्तव ने 15 अगस्त को आयोजित कार्यक्रम में अधिकारी को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।
MP को मिला ₹11.22 करोड़ का राजस्व
इस नीति के तहत मध्यप्रदेश में उपलब्ध EVM संसाधनों का दूसरे राज्यों की चुनावी जरूरतों के लिए उपयोग किया गया। इससे मध्यप्रदेश शासन को कुल ₹11 करोड़ 22 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ। आयोग के मुताबिक, किसी राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा EVM शेयरिंग व्यवस्था के जरिए राजस्व अर्जित करने का यह अपनी तरह का पहला मामला बताया जा रहा है।
पांच राज्यों को ₹200 करोड़ की बचत
EVM शेयरिंग व्यवस्था का लाभ महाराष्ट्र, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ को मिला। इन राज्यों ने नई EVM खरीदने के बजाय मध्यप्रदेश से उपलब्ध मशीनों का उपयोग किया। इससे इन राज्यों को करीब ₹200 करोड़ की संभावित खरीद लागत बचाने में मदद मिली। इन राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव EVM के जरिए कराए गए।
नई EVM खरीद की जरूरत हुई कम
इस मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह रहा कि जिन राज्यों को स्थानीय निकाय चुनावों के लिए बड़ी संख्या में EVM की जरूरत थी, उन्हें नई मशीनें खरीदने पर भारी राशि खर्च नहीं करनी पड़ी। उपलब्ध संसाधनों को साझा करने से चुनावी खर्च कम हुआ और मौजूदा मशीनों का बेहतर इस्तेमाल संभव हुआ।
2027 के चुनावों के लिए भी योजना
EVM शेयरिंग मॉडल की सफलता के बाद मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग भविष्य के स्थानीय निकाय चुनावों में भी इसका इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत 2027 के आम चुनाव के दौरान मध्यप्रदेश अन्य राज्यों से EVM लेकर स्थानीय निकाय चुनावों में उनका इस्तेमाल कर सकता है।
एक चरण में स्थानीय निकाय चुनाव कराने की तैयारी
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जिला पंचायत से लेकर पंच पद तक के स्थानीय निकाय चुनाव एक साथ और एक ही चरण में EVM के माध्यम से कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो चुनाव प्रक्रिया में लगने वाले समय, संसाधन और खर्च को कम किया जा सकेगा।
चुनाव प्रबंधन में संसाधन साझाकरण का मॉडल
EVM शेयरिंग पॉलिसी को संसाधनों के साझा उपयोग और चुनावी खर्च में कमी का मॉडल माना जा रहा है। मध्यप्रदेश के लिए यह जहां राजस्व अर्जित करने का माध्यम बनी है, वहीं दूसरे राज्यों को EVM की नई खरीद पर होने वाले बड़े खर्च से राहत मिली है। आने वाले समय में यह व्यवस्था अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी मॉडल बन सकती है।