मैहर - मध्य प्रदेश के मैहर जिले में स्थित गोला मठ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन और आस्था से जुड़ा धार्मिक स्थल है। मंदिर अपनी अनोखी पत्थर की वास्तुकला के साथ-साथ एक बेहद रोचक पौराणिक मान्यता के लिए भी प्रसिद्ध है। सावन के महीने में यहां शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और सावन के सोमवार को दर्शन के लिए लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।
एक रात में मंदिर बनाने की मान्यता
गोला मठ मंदिर के निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर मान्यता है कि देवताओं के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा ने इसे केवल एक रात में तैयार किया था। कहा जाता है कि उन्होंने अपनी दिव्य शिल्पकला से रातोंरात इस मंदिर का निर्माण कर दिया। इस मान्यता का उल्लेख मैहर जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर भी मिलता है। हालांकि, एक रात में मंदिर निर्माण की बात धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखी जाती है।

पत्थरों की अनोखी नक्काशी
गोला मठ मंदिर की वास्तुकला इसे दूसरे मंदिरों से अलग पहचान देती है। मंदिर में इस्तेमाल किए गए पत्थरों को बेहद खूबसूरती से तराशा गया है। पत्थरों की संरचना और उन्हें जोड़ने का तरीका मंदिर को आकर्षक रूप देता है। मंदिर को देखकर इसकी प्राचीन निर्माण शैली और शिल्पकला का अंदाजा लगाया जा सकता है। यही वजह है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं के साथ इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वाले लोग भी इसकी बनावट को करीब से देखते हैं।
सावन के सोमवार को उमड़ती है भीड़
भगवान शिव को समर्पित होने के कारण सावन का महीना गोला मठ मंदिर के लिए बेहद खास माना जाता है। सावन के प्रत्येक सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। भक्त लंबी कतारों में लगकर भगवान शिव के दर्शन करते हैं और शिवलिंग पर जल चढ़ाकर जलाभिषेक करते हैं। आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज से भी श्रद्धालु मंदिर में पहुंचते हैं।
बेहद प्राचीन है मंदिर का शिवलिंग
मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव का प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार इसकी प्राचीनता काफी पुरानी है, लेकिन इसके प्रकट होने की निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है। गर्भगृह से बाहर निकलने पर प्रवेश द्वार के पास पत्थर से निर्मित प्राचीन नंदी की प्रतिमा भी दिखाई देती है। नंदी की यह प्रतिमा मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक महत्व को और बढ़ाती है।

आस्था और रहस्य का संगम
गोला मठ मंदिर की खासियत केवल इसकी धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि इसकी प्राचीन वास्तुकला भी है। भगवान विश्वकर्मा द्वारा एक रात में मंदिर बनाए जाने की स्थानीय मान्यता, प्राचीन शिवलिंग, पत्थर की नक्काशी और सावन में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इसे मैहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में खास पहचान देती है। अगर आप सावन में मैहर की यात्रा कर रहे हैं, तो गोला मठ मंदिर भगवान शिव के दर्शन के साथ-साथ इसकी अनोखी स्थापत्य कला देखने के लिए भी एक खास जगह हो सकती है।