मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश में 5,374 MSME बंद हुए हैं, जिससे करीब 42 हजार लोगों के रोजगार प्रभावित होने का अनुमान है।कमलनाथ ने इसे प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से चिंता का विषय बताते हुए सरकार से MSME नीति की समीक्षा करने की मांग की है।
बढ़ता कर्ज और घटती मांग को बताया बड़ी वजह
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में कहा कि बड़े पैमाने पर MSME बंद होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें बढ़ता कर्ज, बाजार में घटती मांग और सरकारी उदासीनता प्रमुख वजहें बताई गई हैं।उनका कहना है कि छोटे और मध्यम उद्योगों के बंद होने का सीधा असर रोजगार पर पड़ता है, क्योंकि इन इकाइयों से बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर पर लोगों को काम मिलता है।
IIM में पढ़ाई जाने वाली 'सक्सेस स्टोरी' भी बंद होने का दावा
कमलनाथ ने अपने बयान में एक ऐसे लघु उद्योग का भी उल्लेख किया, जिसे IIM में MSME की सफलता की कहानी के तौर पर पढ़ाए जाने की बात कही जाती थी। उन्होंने दावा किया कि वह उद्योग भी अब बंद हो चुका है।
बीजेपी सरकार की MSME नीति पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आरोप लगाया कि प्रदेश की बीजेपी सरकार MSME को बढ़ावा देने और उन्हें संरक्षण देने में विफल रही है। उनके मुताबिक, उद्योगों के सामने आ रही समस्याओं को समय रहते दूर करने की जरूरत है।उन्होंने सरकार से मांग की कि बंद हो चुकी औद्योगिक इकाइयों के संचालकों से सीधे संवाद किया जाए और उनकी समस्याओं को समझकर समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएं।
बंद उद्योगों को दोबारा शुरू करने की योजना की मांग
कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश के हित को देखते हुए सरकार को अपनी मौजूदा MSME नीति की समीक्षा करनी चाहिए। साथ ही बंद हो चुके उद्योगों को दोबारा शुरू कराने के लिए विशेष योजना तैयार करने की जरूरत है।उनके मुताबिक, MSME क्षेत्र को मजबूत करने से न केवल औद्योगिक गतिविधियों को गति मिल सकती है, बल्कि बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी बचाए और पैदा किए जा सकते हैं।