बिहार: बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पटना के गर्दनीबाग में छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक, लंबित बहाली और परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। आंदोलन अब केवल सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहा है। इसमें शिक्षक भर्ती, उच्च शिक्षा और सहायक प्राध्यापक भर्ती से जुड़े मुद्दे भी शामिल हो गए हैं। कई शोधार्थी और अतिथि शिक्षक भी आंदोलन में शामिल होकर अपनी मांगें उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि केवल नई भर्तियों के विज्ञापन जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। वे पूरी भर्ती व्यवस्था को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं।
गर्दनीबाग में आमरण अनशन पर छात्र नेता अमन कुमार
गर्दनीबाग में चल रहे आंदोलन के बीच कई छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं। छात्र नेता अमन कुमार भी पिछले चार दिनों से आमरण अनशन कर रहे हैं। लगातार अन्न-जल त्यागने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। इसके बावजूद अमन कुमार ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। उन्होंने वीडियो संदेश के जरिए बिहार के छात्रों, अभ्यर्थियों और युवाओं से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उनका कहना है कि छात्र अपनी इच्छा से सड़कों पर नहीं उतरे हैं, बल्कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी और कथित अनियमितताओं ने उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर किया है। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।
‘यह सिर्फ मेरी नहीं, बिहार के युवाओं की लड़ाई’
अमन कुमार ने अपने संदेश में कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। उनके मुताबिक यह बिहार के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक और वर्षों तक बहाली लंबित रहने को लेकर सवाल उठाए। अमन कुमार का कहना है कि कई प्रमुख भर्तियों में परीक्षा प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रहती है। इससे अभ्यर्थियों की उम्र बढ़ती जाती है और वे दूसरी परीक्षाओं की तैयारी भी ठीक से नहीं कर पाते। उन्होंने परीक्षा कैलेंडर को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की। साथ ही युवाओं से गर्दनीबाग पहुंचकर आंदोलन को मजबूत करने की अपील की।
‘जिंदा रहते लड़ाई में साथ दें’, अमन की भावुक अपील
आमरण अनशन के बीच अमन कुमार ने छात्रों और युवाओं से भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि जब तक वह जिंदा हैं, तब तक उनकी आवाज को आंदोलन के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने युवाओं से अभी आंदोलन में साथ देने की अपील करते हुए कहा कि बाद में समर्थन देने का कोई मतलब नहीं होगा। अमन ने देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए छात्र आंदोलनों का उदाहरण देते हुए एकजुट होकर आवाज उठाने की बात कही। उनका कहना है कि जब युवा बड़ी संख्या में एकजुट होते हैं तो सरकार तक उनकी आवाज मजबूती से पहुंचती है। उन्होंने युवाओं से अपने अधिकारों और भविष्य के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखने की अपील की। इस बयान के बाद आंदोलन को लेकर छात्रों के बीच चर्चा और तेज हो गई है।
18 दिन से आमरण अनशन पर शोधार्थी कुमुद पटेल
गर्दनीबाग आंदोलन में शोधार्थी कुमुद पटेल भी आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनके मुताबिक शुक्रवार को उनके अनशन का 18वां दिन है। उन्होंने दावा किया कि अभी तक सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं पहुंचा है। कुमुद पटेल ने कहा कि उच्च शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए। उन्होंने बताया कि आंदोलनकारी अब 22 अगस्त को लोक भवन तक मार्च निकालने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य खराब होने की स्थिति में भी आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से बातचीत कर जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी, फिर भी आंदोलन क्यों?
बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा-4 यानी TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद छात्रों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। TRE-4 के तहत 32,388 शिक्षकों की भर्ती की जानी है। आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगी। इसके बावजूद अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी कई अन्य मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। छात्र TRE-4 की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक दो-स्तरीय परीक्षा के बजाय एकल परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए। इसके साथ ही निगेटिव मार्किंग खत्म करने की मांग भी की जा रही है। छात्रों का कहना है कि भर्ती की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, परीक्षा प्रक्रिया भी उनके लिए पारदर्शी और समान अवसर वाली होनी चाहिए।
BSSC की लंबित परीक्षाएं भी आंदोलन का बड़ा मुद्दा
छात्रों की प्रमुख मांगों में बिहार कर्मचारी चयन आयोग की लंबित परीक्षाओं को जल्द कराने की मांग भी शामिल है। अभ्यर्थियों का कहना है कि कई परीक्षाओं की प्रक्रिया लंबे समय से पूरी नहीं हो पाई है। परीक्षा की तारीखों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है, जिससे तैयारी कर रहे युवाओं को परेशानी होती है। आंदोलनकारी चाहते हैं कि सभी लंबित परीक्षाओं की तारीख जल्द घोषित की जाए। उनका कहना है कि परीक्षा कैलेंडर केवल कागज पर जारी करने के बजाय उसे तय समय सीमा में लागू किया जाना चाहिए। भर्ती प्रक्रिया में देरी से अभ्यर्थियों का समय और अवसर दोनों प्रभावित होते हैं। इसलिए छात्र लंबित परीक्षाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की मांग कर रहे हैं।
संविदाकर्मियों के वेटेज का भी विरोध
आंदोलनकारी अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में संविदाकर्मियों को दिए जाने वाले अतिरिक्त अंकों यानी वेटेज का भी विरोध कर रहे हैं। छात्रों का तर्क है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना है कि किसी विशेष श्रेणी को अतिरिक्त लाभ मिलने से सामान्य अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। इसके साथ ही 1799 दरोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा और बिहार लोक सेवा आयोग से जुड़े कई मुद्दे भी आंदोलन का हिस्सा हैं। प्रदर्शनकारी सभी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और समयबद्ध प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अलग-अलग परीक्षाओं के लिए अलग नियमों से अभ्यर्थियों के बीच असमंजस पैदा होता है। इसलिए भर्ती नियमों को स्पष्ट और अभ्यर्थी हित में बनाने की मांग की जा रही है।
22 अगस्त को राजभवन मार्च की तैयारी
गर्दनीबाग का छात्र आंदोलन अब 22 अगस्त को बड़े मार्च का रूप लेने जा रहा है। छात्रों, शोधार्थियों और अतिथि शिक्षकों ने राजभवन मार्च का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारी आर-ब्लॉक स्थित वीर कुंवर सिंह पार्क से मार्च निकालकर लोक भवन तक जाने की तैयारी में हैं। मार्च के दौरान शिक्षक भर्ती और उच्च शिक्षा से जुड़े कई मुद्दे उठाए जाएंगे। छात्रों की प्रमुख मांगों में TRE-4 की दो-स्तरीय परीक्षा व्यवस्था को वापस लेना शामिल है। इसके अलावा सहायक प्राध्यापक भर्ती के नियमों में बदलाव और खाली पदों को भरने की मांग भी रखी जाएगी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उच्च शिक्षा और रोजगार से जुड़े रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति होनी चाहिए।
13 से 14 सूत्रीय मांगों पर अड़ा छात्र आंदोलन
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उनका प्रदर्शन किसी एक भर्ती परीक्षा को लेकर नहीं है। वे करीब 13 से 14 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार कर्मचारी चयन आयोग, दरोगा भर्ती, TRE-4 और शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। छात्र भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। साथ ही लंबित परीक्षाओं को जल्द कराने और भर्ती प्रक्रिया को तय समय सीमा में पूरा करने की मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। छात्र नेताओं ने भी सरकार से बातचीत कर गतिरोध खत्म करने की अपील की है।
‘सिर्फ नोटिफिकेशन से खत्म नहीं होगा छात्रों का गुस्सा’
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि नई भर्ती का नोटिफिकेशन जारी होना समस्या का पूरा समाधान नहीं है। उनकी नाराजगी पूरी भर्ती व्यवस्था को लेकर है। छात्रों की मांग है कि परीक्षाएं तय समय पर हों और परिणाम एवं नियुक्ति प्रक्रिया भी समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए। उनका कहना है कि कई युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा टलने या भर्ती प्रक्रिया लंबी खिंचने से उनका समय और उम्र दोनों प्रभावित होते हैं। इसी वजह से छात्र परीक्षा कैलेंडर के प्रभावी पालन की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की बात कह रहे हैं। फिलहाल गर्दनीबाग में आंदोलन जारी है और 22 अगस्त का राजभवन मार्च इस आंदोलन का अगला बड़ा पड़ाव माना जा रहा है।
आगे क्या?
गर्दनीबाग में आमरण अनशन और 22 अगस्त के राजभवन मार्च के ऐलान के बाद बिहार में छात्र आंदोलन और तेज होने की संभावना है। एक तरफ सरकार की ओर से TRE-4 जैसी भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ अभ्यर्थी परीक्षा व्यवस्था और लंबित भर्तियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आंदोलन में अब शोधार्थियों और उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों की भागीदारी भी बढ़ रही है। ऐसे में सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत इस आंदोलन की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर चुके हैं।