नई दिल्ली - भारत में दालों की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। घटते आयात और घरेलू उत्पादन में संभावित गिरावट के चलते आने वाले समय में दालों के दाम बढ़ सकते हैं। अल-नीनो के खतरे के बीच कम बारिश और सूखे की आशंका ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
आयात घटने से बढ़ा महंगाई का खतरा
भारत अपनी दालों की घरेलू जरूरत का एक हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में आयात में कमी आने पर घरेलू बाजार में उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। अगर उत्पादन भी अनुमान के मुताबिक कम रहा, तो दालों की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
स्काईमेट ने जताई 70 फीसदी सूखे की आशंका
निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने अल-नीनो के प्रभाव के बीच 70 फीसदी सूखे की आशंका जताई है। अगर मानसून कमजोर रहता है, तो दलहन फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर बाजार में दालों की कीमतों पर पड़ सकता है।
सरकार बोली- पर्याप्त स्टॉक मौजूद
हालांकि, सरकार ने दालों की उपलब्धता को लेकर लोगों को राहत दी है। सरकार का कहना है कि देश में दालों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। फिर भी अगर आयात में कमी और कमजोर उत्पादन की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो आगे चलकर अरहर, उड़द, मसूर और चना जैसी प्रमुख दालों की कीमतों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में मानसून, घरेलू उत्पादन और आयात के आंकड़ों पर बाजार की नजर रहेगी।
अभी क्या चल रहे हैं दालों के भाव?
केंद्र सरकार के Price Monitoring System के 20 अगस्त 2026 के अखिल भारतीय औसत खुदरा आंकड़ों के अनुसार, दालों की कीमतें इस समय इस स्तर पर हैं:
अरहर/तूर दाल: ₹123.56 प्रति किलो
उड़द दाल: ₹122.12 प्रति किलो
मूंग दाल: ₹111.98 प्रति किलो
मसूर दाल: ₹90.37 प्रति किलो
चना दाल: ₹87.05 प्रति किलो
ये अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमतें हैं और अलग-अलग शहरों, दुकानों, गुणवत्ता तथा ब्रांड के हिसाब से वास्तविक भाव अलग हो सकते हैं।