भोपाल. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश का पहला ‘एल्गी ट्री’ स्थापित किया है। यह अत्याधुनिक इकाई स्वामी विवेकानंद पार्क में लगाई गई है, जिसे ‘मशरूम वर्ल्ड ग्रुप’ ने विकसित किया है। लगभग तीन मीटर ऊंची इस संरचना को विशेष रूप से शहरी प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। बढ़ते वायु प्रदूषण, घटती हरियाली और गर्म होते शहरों के बीच यह तकनीक एक नई उम्मीद के रूप में देखी जा रही है।
फोटो-बायोरिएक्टर तकनीक से करेगा हवा को शुद्ध
यह एल्गी ट्री अत्याधुनिक ‘फोटो-बायोरिएक्टर’ तकनीक पर काम करता है। इसमें सूक्ष्म शैवाल यानी एल्गी का उपयोग किया जाता है, जो कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन छोड़ते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रणाली हर वर्ष लगभग 1.5 टन कार्बन डाइऑक्साइड को वातावरण से हटाने की क्षमता रखती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की पर्यावरणीय तकनीक के रूप में देखा जा रहा है, खासकर उन शहरों में जहां प्रदूषण लगातार गंभीर रूप ले रहा है।
25 पेड़ों के बराबर असरदार बताई जा रही तकनीक
परियोजना से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि एल्गी ट्री की एक इकाई लगभग 25 परिपक्व पेड़ों के बराबर प्रभावी साबित हो सकती है। यह अपने आसपास लगभग 15 मीटर के दायरे में पीएम 2.5 कणों को 45 से 55 प्रतिशत तक कम करने में सक्षम है। यही नहीं, यह इकाई ऑक्सीजन स्तर सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। शहरी क्षेत्रों में जहां जगह की कमी के कारण बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण संभव नहीं हो पाता, वहां यह तकनीक उपयोगी विकल्प के रूप में सामने आई है।
दो वर्षों की मेहनत और 50 विशेषज्ञों का योगदान
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को विकसित करने में लगभग दो वर्ष का समय लगा। इस दौरान 50 से अधिक वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने मिलकर इस प्रणाली को तैयार किया। यह परियोजना भोपाल स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत विकसित की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक केवल प्रयोगात्मक स्तर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में देश के अन्य महानगरों और औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसे स्थापित किया जा सकता है।
सौर ऊर्जा से संचालित, रखरखाव भी अपेक्षाकृत आसान
एल्गी ट्री की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होता है। इससे बिजली की अतिरिक्त खपत नहीं होती और यह पर्यावरण के अनुकूल बना रहता है। इसके रखरखाव की प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत सरल बताई जा रही है। प्रशासन का मानना है कि व्यस्त सड़कों, सार्वजनिक स्थलों और उन इलाकों में जहां हरियाली विकसित करना कठिन है, वहां यह तकनीक काफी कारगर सिद्ध हो सकती है।
बढ़ते प्रदूषण और गर्मी के बीच नई उम्मीद
देश के बड़े शहर आज बढ़ते तापमान, खराब वायु गुणवत्ता और सिकुड़ते हरित क्षेत्रों की समस्या से जूझ रहे हैं। वाहनों का धुआं, निर्माण गतिविधियां और धूल के कारण पीएम 2.5 तथा पीएम 10 जैसे प्रदूषक लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में भोपाल का यह प्रयास न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल भी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में भारतीय शहरों की हवा को स्वच्छ बनाने में एल्गी ट्री महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।