कोलकाता:डायमंड हार्बर से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मिलने के बाद अब कोलकाता हाईकोर्ट में नई कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में लिखित आवेदन दाखिल कर अभिषेक बनर्जी को सभी एफआईआर (FIR) के मामलों में दी गई 'ब्लैंकेट सुरक्षा' (कठोर कार्रवाई से राहत) को वापस लेने की अपील की है। मामले में फैसला आने से ठीक पहले राज्य सरकार की ओर से यह लिखित रुख अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
कुल 16 एफआईआर दर्ज, 8 मामलों में मिली है कानूनी राहत
विभिन्न विवादित टिप्पणियों और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े मामलों में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कुल 16 पुलिस शिकायतें और एफआईआर दर्ज हैं। इनमें से 4 संवेदनशील मामलों में हाईकोर्ट ने उन्हें पहले ही सुरक्षा प्रदान की थी, जिसकी अवधि 31 अगस्त तक बढ़ाई गई थी। हालिया सुनवाई में न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने सेवाश्रय से जुड़े मामले में 11 सितंबर तक राहत बढ़ा दी, जबकि तीन अन्य मामलों में भी राहत मिली है। इस तरह कुल 16 मामलों में से अब तक 8 मामलों में उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा मिल चुकी है। बाकी 8 मामलों में सुरक्षा की मांग को लेकर 28 अगस्त को सुनवाई होने की संभावना है, जबकि 12 मामलों पर फैसला 25 अगस्त को सुनाया जाना तय है।
राज्य सरकार की दलील: 'ब्लैंकेट प्रोटेक्शन' अग्रिम जमानत जैसा
हाईकोर्ट में दाखिल अपने लिखित आवेदन में राज्य सरकार ने तर्क दिया है कि बिना हर एफआईआर और केस डायरी की विस्तृत जांच किए इस प्रकार की 'ब्लैंकेट सुरक्षा' देना कानून के अनुकूल नहीं है। सरकार का कहना है कि यह सुरक्षा व्यावहारिक रूप से अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के समान है। राज्य ने याचिकाकर्ता पर कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक तथ्य छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि एकतरफा दी गई यह राहत तुरंत वापस ली जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट से मिली विदेश यात्रा की हरी झंडी
इससे पहले, 5 अगस्त को कोलकाता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की विदेश जाकर इलाज कराने की याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट का तर्क था कि बनर्जी राज्य सरकार द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित नहीं हुए थे। हालांकि, बनर्जी की ओर से दलील दी गई थी कि वे अमेरिका के उसी विशेषज्ञ डॉक्टर से आंखों का इलाज कराना चाहते हैं, जिन्होंने पूर्व में उनकी सर्जरी की थी। इसके बाद अभिषेक बनर्जी ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां से उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मिल गई।