कोलकाता/मेदिनीपुर: पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा महिलाओं के लिए घोषित वित्तीय सहायता योजना 'अन्नपूर्णा' को लेकर पूरे राज्य में असंतोष गहराता जा रहा है। भत्ते का भुगतान न होने और सत्यापन प्रक्रिया में प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए शुक्रवार को राज्य के कई जिलों में वंचित महिलाओं ने जमकर हंगामा किया, सड़क व रेल मार्ग बाधित किए और धरना प्रदर्शन किया। पश्चिम मेदिनीपुर के जिला मुख्यालय में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी महिलाएं कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर घुस आईं, जिसके चलते शहरी विकास एवं नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्र पॉल को अपनी पूर्वनिर्धारित प्रशासनिक बैठक स्थगित कर प्रदर्शनकारियों से वार्ता करने नीचे आना पड़ा।
पश्चिम मेदिनीपुर में मंत्री अग्निमित्र पॉल ने रोकी बैठक, नोडल अधिकारी की नियुक्ति का निर्देश
पश्चिम मेदिनीपुर जिला अधिकारी कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भवन के निचले हिस्से में दाखिल हो गईं और नारेबाजी करने लगीं। दोपहर लगभग 2:30 बजे मंत्री अग्निमित्र पॉल, जिला अधिकारी बिजिन कृष्णा और स्थानीय विधायक शंकर गुछैत के साथ बाहर आईं। महिलाओं ने शिकायत की कि उन्हें एक महीने की भी राशि नहीं मिली है और कागजी कार्रवाई के लिए उन्हें एसडीओ (SDO) और नगर पालिका कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इस पर मंत्री ने तुरंत जिला अधिकारी को एक 'नोडल अधिकारी' नियुक्त करने का निर्देश दिया और महिलाओं को एसडीओ या बीडीओ कार्यालय में अपने दस्तावेज जमा करने का आश्वासन दिया।

उत्तर और दक्षिण बंगाल के कई जिलों में चक्का जाम और प्रदर्शन
अन्नपूर्णा योजना की राशि न मिलने के विरोध में राज्य के अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन की लहर देखी गई। उत्तर 24 परगना के बिराटी में महिलाओं ने रेल सेवा बाधित की, जबकि जलपाईगुड़ी जिले के मयनागुड़ी-चालसा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 717) पर मौलानी और लाटागुड़ी ग्राम पंचायत दफ्तरों के सामने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया गया, जिससे डेढ़ घंटे तक यातायात बाधित रहा। इसी तरह हुगली के तारकेश्वर नगर पालिका भवन के बाहर और हावड़ा के बागनान 2 नंबर ब्लॉक मुख्यालय पर भी महिलाओं ने रास्ता रोककर प्रदर्शन किया।
बालुरघाट में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को बनाया बंधक
दक्षिण दिनाजपुर के बालुरघाट ब्लॉक अंतर्गत मयामारी में स्थिति तब बिगड़ गई जब ग्रामीण महिलाओं ने स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को केंद्र के भीतर बंद कर ताला लगा दिया। महिलाओं का आरोप था कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने घर-घर जाकर सही तरीके से भौतिक सत्यापन (सर्वे) नहीं किया, जिसकी वजह से उनके आवेदन खारिज हो गए। घटना की सूचना मिलते ही बालुरघाट थाने से भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रण में लिया।
17 अगस्त से शुरू हुई थी राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया
राज्य सरकार की ओर से 17 अगस्त से पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में अन्नपूर्णा योजना की राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई थी और 20 अगस्त तक सभी के खातों में पैसे पहुंच जाने का दावा किया गया था। हालांकि, समयसीमा बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में आवेदकों के खातों में वित्तीय सहायता नहीं पहुंची। हावड़ा और पूर्व मेदिनीपुर में प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है कि नियम के अनुसार आवेदन पत्र भरने के बावजूद न तो पैसा आया है और न ही प्रशासन की ओर से उनके आवेदन की वर्तमान स्थिति (स्टेटस) की स्पष्ट जानकारी दी जा रही है।