नई दिल्ली. देश में पहले से महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों के लिए आने वाले दिन और मुश्किल भरे हो सकते हैं। पेट्रोल-डीजल तथा दूध की कीमतों में हाल में हुई बढ़ोतरी का असर अब व्यापक स्तर पर दिखाई देने लगा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन जरूरी वस्तुओं के महंगे होने से खुदरा महंगाई दर में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसका सीधा असर घरेलू बजट, परिवहन खर्च और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईंधन महंगा होने से हर क्षेत्र पर पड़ेगा असर
अर्थशास्त्रियों के अनुसार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका प्रभाव पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है। माल ढुलाई, परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से बाजार तक पहुंचने वाली लगभग हर वस्तु महंगी हो जाती है। फल, सब्जियां, अनाज और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने लगती है। यही वजह है कि ईंधन मूल्यों में वृद्धि को महंगाई का बड़ा कारक माना जाता है।
डेयरी उत्पाद भी हो सकते हैं महंगे
दूध की कीमतों में वृद्धि का असर केवल दूध तक सीमित नहीं रहने वाला है। विशेषज्ञों का कहना है कि घी, दही, पनीर, मिठाई और अन्य डेयरी उत्पादों की लागत भी बढ़ सकती है। इससे खाद्य महंगाई में अतिरिक्त दबाव बनेगा। परिवारों के मासिक खर्च में डेयरी उत्पादों की बड़ी हिस्सेदारी होती है, इसलिए मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर इसका प्रभाव अधिक महसूस किया जा सकता है।
अर्थशास्त्रियों ने जताई महंगाई बढ़ने की आशंका
डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव के अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तीन से पांच प्रतिशत तक की वृद्धि से खुदरा महंगाई में 0.15 से 0.25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं भारतीय स्टेट बैंक के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मई और जून 2026 के दौरान इसका तत्काल प्रभाव 15 से 20 बेसिस पॉइंट तक दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
संयुक्त प्रभाव से बढ़ सकती है महंगाई दर
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा ने चेतावनी दी है कि ईंधन और दूध की कीमतों में संयुक्त बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई दर लगभग 0.42 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। उनका कहना है कि इसका अप्रत्यक्ष असर और भी अधिक व्यापक होगा, क्योंकि परिवहन तथा ऊर्जा आधारित उद्योगों की लागत भी बढ़ेगी। इससे निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण और उपभोक्ता वस्तुओं के दामों में भी उछाल आ सकता है।
आम आदमी पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव
लगातार बढ़ती महंगाई ने पहले ही आम परिवारों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है। रसोई गैस, खाद्य पदार्थों और परिवहन खर्च के बाद अब दूध और ईंधन के महंगे होने से घरेलू बजट और अधिक प्रभावित होने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं की क्रय क्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है।