वीरभूम: फलहारिणी अमावस्या के अवसर पर पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध शक्तिपीठ तारापीठ मंदिर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मां तारा की विशेष पूजा और दर्शन के लिए बंगाल समेत देश के विभिन्न राज्यों से हजारों भक्त तारापीठ पहुंच रहे हैं। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है।
विशेष पूजा और तंत्र साधना का आयोजन
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष अमावस्या को फलहारिणी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। तंत्र साधना और शक्ति उपासना के लिए इस तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। तारापीठ में सुबह से ही विशेष पूजा, हवन-यज्ञ, चंडीपाठ और मां तारा का भव्य श्रृंगार किया गया। वहीं रातभर तांत्रिक साधना भी जारी रहेगी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस वर्ष लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग और ट्रैफिक कंट्रोल की विशेष व्यवस्था की गई है।
तारापीठ में बढ़ी कारोबार की रौनक
फलहारिणी अमावस्या को लेकर तारापीठ का बाजार भी पूरी तरह गुलजार हो उठा है। होटल, लॉज, फूल, प्रसाद और पूजा सामग्री की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। स्थानीय व्यापारियों को भी इस धार्मिक आयोजन से अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है।
मां तारा की आराधना से पूरी होती है मनोकामना
साधक बामाखेपा की साधना भूमि के रूप में प्रसिद्ध तारापीठ में श्रद्धालुओं का मानना है कि फलहारिणी अमावस्या के दिन मां तारा की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के साथ लाखों भक्त तारापीठ धाम पहुंच रहे हैं।